नमस्कार,

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष जी को लोगों से शिकवा है कि पाकिस्तान वाले बयान को तोड़-मरोड़ दिया। मंत्रीजी कार्यकर्ताओं को टिकट कहां से दे पाएंगे, जब घर में लंबी लाइन लगी है। नाम वापस करवाने के लिए विधायकजी महिला का हाथ पकड़ दौड़ पड़े।

राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में…

1. मदन राठौड़ का बयान


या तो धुरंधर में पाकिस्तान का जिक्र हुआ था। या फिर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष जी ने किया है।

बात सादा सिंपल थी। क्रिकेट से जुड़ी थी। अध्यक्ष जी बोले- अगर अमेरिका और पाकिस्तान में मैच होगा तो हम पाकिस्तान का साथ देंगे, क्योंकि वह हमारा पड़ोसी है।

और अगर भारत-पाकिस्तान के बीच मैच होगा तो हम भारत का ही साथ देंगे। कुछ लोग भारत की हार पर पटाखे फोड़ते हैं, क्या यह देशभक्ति है?

‘पाकिस्तान का साथ देंगे’ वाली बात को खूब उछाला गया। अध्यक्ष जी को सफाई देनी पड़ी। बोले- यह मतलब नहीं था। बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।


2. मंत्री फैमिली का ‘पर्चा भरो’ प्रोग्राम

सीकर के श्रीमाधोपुर में भाजपा के पुराने कार्यकर्ता ने उदासी, खिन्नता, क्रोध और संयम को मिला-जुलाकर बयान दिया। बोले- मेरा नाम श्याम चौधरी है। मैं भाजपा किसान मोर्चा में दो टर्म जिलाध्यक्ष रहा।

प्रदेश कार्यालय मंत्री रहा। 15 साल काम किया। कंट्रोवर्सी से दूर रहा। सर्वे में टॉप पर रहा फिर भी मेरी पत्नी को पार्टी ने टिकट नहीं दिया।

उन्होंने मंत्रीजी पर आरोप लगाया- व्यक्तिगत द्वेष और राजनीति में कोई आगे न बढ़ जाए, इस भावना के कारण मेरा टिकट कटवा दिया गया। मैंने पत्नी को निर्दलीय पर्चा भरवाया।

व्यक्तिगत द्वेष वाली बात को उन्होंने खुलासा समझाया- पिछली बार मैंने जिला परिषद का चुनाव लड़ा था। लेकिन हार गया। उस वक्त स्थानीय नेतृत्व मंत्रीजी का था, उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को बोलकर हरवा दिया। पार्टी की मुखालफत की। मैंने जिलाध्यक्ष को सबूत दिए।

इस बार मैं वार्ड 23 से पत्नी के लिए टिकट मांग रहा था। लेकिन व्यक्तिगत द्वेष के कारण…

कार्यकर्ता की लंबी-चौड़ी दलील को यह कहकर खारिज किया जा सकता है कि जब मंत्रीजी का बड़ा बेटा निर्दलीय पर्चा भर सकता है तो आपको निर्दलीय उतरने में क्या दिक्कत है भाईसाब?

मंत्रीजी के छोटे भाई की पत्नी ने भी निर्दलीय ही पर्चा भरा, उन्होंने तो कोई आरोप-इल्जाम नहीं लगाया। फिर आपको क्या दिक्कत है भाईसाब?

मंत्रीजी की पत्नी और छोटे बेटे को पार्टी ने टिकट दिया है। मंत्री अपनी पार्टी से दो टिकट की आशा कर ही सकता है। आशा कर ली तो आपको क्या दिक्कत है भाईसाब?


3. लेडी का हाथ पकड़ दौड़े विधायकजी

सफल जनप्रतिनिधि वही है जो भाग-दौड़ में कमी न रखे। लादूलाल पितलिया भीलवाड़ा के सहाड़ा से विधायक हैं।

वे सेहत का ध्यान रखते हैं। सेहत सही रहे तो भाग-दौड़ में कसर नहीं रहती। वार्ड 23 से रेखा देवी ने नामांकन भरा था।

नाम वापसी के आखिरी दिन अंतिम वक्त उनका न जाने किन कारणों से हृदय परिवर्तन हो गया और उन्होंने नाम वापस लेने की इच्छा जताई।

उन्होंने अपनी इच्छा विधायकजी को बताई। विधायकजी समय का महत्व जानते थे। नाम वापस लेने में 8 मिनट शेष थे। विधायकजी महिला के साथ कार में सवार हुए। एंबुलेंस की गति से कार आगे बढ़ी।

कलेक्ट्रेट परिसर में विधायकजीने रेखा देवी का हाथ पकड़ा और दौड लगा दी। दिमाग में टाइमर चल रहा था। दस नौ आठ सात…

कलेक्ट्रेट की सीढ़ियां भी विधायक जी दौड़ते हुए चढ़े। आखिर नाम वापस कराकर ही उन्होंने सांस ली। ऐसी ही दौड़ अगर जनता के काम करने के लिए लगाई जाए तो देश स्वर्ग बन जाए।


4. चलते-चलते...

2024 में पेरिस ओलंपिक के दौरान चीन 91 मेडल के साथ दूसरे स्थान पर था। जबकि भारत ने 6 मेडल जीते थे और 71वें स्थान पर रहा था। चीन से हम जनसंख्या में ही आगे निकल पाए।

क्यों? क्योंकि यहां क्रिकेट को छोड़कर अन्य खेलों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है।

बालोतरा में सिणधरी के पायला गांव के स्कूल में जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिता हाल ही सम्पन्न हुई। इसमें हुई बांस कूद प्रतियोगिता का एक वीडियो सामने आया। जिसमें चार बांस के सहारे प्रतियोगिता करा दी गई।

फोम लैंडिंग मैट की जगह मिट्‌टी का ढेर लगा था। न कोई कोच न किसी तरह की सुविधाएं।

हालांकि न के बराबर संसाधनों में भी एक खिलाड़ी बांस के सहारे ऊंचा कूदने में कामयाब रहा। खिलाड़ियों से यही उम्मीद की जाती है कि वे अभाव को ही पोल वॉल्ट समझकर कूद पड़ें।