
बालोद। हरियाली बढ़ाने, पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन जैसे चुनौतियों से निपटने की दिशा में बालोद जिला प्रशासन द्वारा उठाया गया कदम को कार्य रूप में परिणित करने की दिशा में आज का दिन ऐतिहासिक एवं अनुकरणीय रहा। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन के मिशन अंकुर के महाभियान के तहत जिले के 83 चिन्हित विभिन्न स्थानों पर आज एक ही दिन में कुल 91 हजार 863 सीड बाॅल का रोपण किया गया। इसके अंतर्गत बालोद जिला प्रशासन के मिशन अंकुर के तहत डौण्डी विकासखण्ड के ग्राम गुजरा के पंडवान में सांसद भोजराज नाग, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक दुर्ग के अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन, जिला पंचायत उपाध्यक्ष तोमन साहू, कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, वनमण्डलाधिकारी अभिषेक अग्रवाल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी, जनपद अध्यक्ष मुकेश कौड़ो, जनपद उपाध्यक्ष भोलाराम नेताम, जिला पंचायत सदस्य सुश्री नीलिमा श्याम सहित अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों आला अधिकारियों, कर्मचारियों शिक्षक-शिक्षिकाओं, छात्र-छात्राओं, बिहान समूह की दीदियों, ग्रामीणों सहित हजारों की संख्या में लोगों ने एक साथ सीड बाॅल का रोपण किया। वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों, आला अधिकारियों सहित समाज के सभी वर्ग के लोगों की उपस्थिति से जिला प्रशासन के मिशन अंकुर के तहत सामूहिक सीड बाॅल रोपण का कार्यक्रम ऐतिहासिक, विहंगम एवं यादगार कार्यक्रम बन गया। निश्चित रूप से मिशन अंकुर के तहत आज संपन्न वृहद कार्यक्रम आने वाले समय के लिए पर्यावरण के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। ज्ञातव्य हो कि मिशन अंकुर के इस महाभियान के तहत आज ग्राम गुजरा के पंडवान सहित जिले के विभिन्न 83 चिन्हित स्थानों पर एक ही दिन में कुल एक 91 हजार 863 सीड बाॅल का रोपण किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद भोजराज नाग ने मिशन अंकुर के तहत बालोद जिला प्रशासन के इस कार्य को ऐतिहासिक एवं अभिनव बताते हुए इसकी भूरी-भूरी सराहना की। उन्होंने कहा कि कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के कुशल नेतृत्व एवं दिशा-निर्देशन में सीड बाॅल रोपण का जो कार्य किया जा रहा है वह पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में सभी के लिए प्रेरणादायी होगा। सीड बाॅल रोपण के अवसर पर उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों ने बालोद जिला प्रशासन के इस अभिनव एवं अनुकरणीय पहल की भूरी-भूरी सराहना करते हुए पर्यावरण के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है।
ज्ञातव्य हो कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों, वनांचलों, और बंजर या खाली पड़ी जमीनों को फिर से हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से बालोद जिला प्रशासन द्वारा मिशन अंकुर के माध्यम से सीड बाॅल का रोपण करने का विशेष पहल की गई है। इसके अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में ’विकसित भारत जी राम जी’ और अन्य विकास योजनाओं के तहत 83 स्थानों पर सीपीटी का निर्माण कराया गया है। सीपीटी मूल रूप से पानी को रोकने और मवेशियों से पौधों को बचाने के लिए बनाई गई गड्ढे होते हैं। इन गड्ढों के आसपास की सुरक्षित जमीन पर इन सीड बॉल्स को प्राकृतिक रूप से पनपने के लिए रखा गया है।
मिशन अंकुर के तहत सीड बाॅल रोपण कार्यक्रम के संबंध में जानकारी कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने बताया कि आज जिस तरह से तापमान बढ़ रहा है और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियाँ सामने आ रही हैं, ऐसे में हमें पारंपरिक वृक्षारोपण के साथ-साथ सीड बॉल जैसी नवोन्मेषी और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। मिशन अंकुर का उद्देश्य केवल बीजारोपण करना नहीं है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण देकर एक विशाल वृक्ष में तब्दील करना है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी ने जिला प्रशासन मिशन अंकुर के उद्देश्यों के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सीड बॉल तकनीक कम लागत, कम समय और कम मेहनत में अधिक से अधिक पौधे उगाने का एक बेहद कारगर और शानदार तरीका है। विशेषकर सीपीटी के आसपास इन्हें लगाने के दोहरे लाभ हैं पहला, गड्ढों में संचित वर्षा जल से बीजों को लंबे समय तक पर्याप्त नमी मिलेगी, और दूसरा, यह क्षेत्र जानवरों की पहुँच से सुरक्षित रहेगा, जिससे पौधों की उत्तरजीविता दर कई गुना बढ़ जाएगी।
सीड बॉल, जिसे आम बोलचाल में ’बीज बम’ भी कहा जाता है, उपजाऊ मिट्टी, जैविक खाद (वर्मी कंपोस्ट), राख और विभिन्न प्रजातियों के बीजों का एक विशेष मिश्रण होता है। इसे हाथों से गोल आकार देकर छाँव में सुखाया जाता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए गहरे गड्ढे खोदने की आवश्यकता नहीं होती है। इन्हें सीधे जमीन पर फेंका या रखा जा सकता है। बारिश के मौसम में जब इन सीड बॉल्स पर पानी की बूँदें गिरती हैं, तो बाहरी मिट्टी का आवरण नमी सोख लेता है और अंदर मौजूद खाद की गर्मी व पोषण से बीज स्वतः ही सुरक्षित रूप से अंकुरित होने लगता है। इस महाभियान में उपयोग की गई सीड बॉल्स में मुख्य रूप से स्थानीय जलवायु के अनुकूल फलदार, छायादार और औषधीय पौधों के बीज उपयोग किए गए हैं। इनमें नीम, पीपल, बरगद, जामुन, करंज, मुनगा, अमरूद, सीताफल और आंवला प्रमुख हैं। इससे न केवल जिले का हरित आवरण तेजी से बढ़ेगा, बल्कि मिट्टी का कटाव रुकेगा, भूजल स्तर में वृद्धि होगी, और स्थानीय पशु-पक्षियों को भी प्राकृतिक आश्रय और भोजन प्राप्त होगा।
इस अभियान की एक सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यह महज एक पर्यावरणीय पहल नहीं है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण का भी एक बेहतरीन उदाहरण है। इन सीड बॉल्स का निर्माण राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुडी स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा किया गया है। महिलाओं ने पिछले कई हफ्तों से दिन-रात मेहनत कर, सही अनुपात में मिट्टी और खाद का मिश्रण तैयार कर इन सीड बॉल्स को आकार दिया है।