नई दिल्ली: चुनाव आयोग के सवालों के घेरे में आने के बाद अब न्यायपालिका पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने शुक्रवार एक बड़ा दावा करते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में कई भ्रष्ट जज रहे हैं, जिससे न्याय व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आगे कहा कि न्यायपालिका अमीर और ताकतवर लोगों के पक्ष में झुक गई है और लगातार ऐसी कार्यपालिका का समर्थन कर रही है जो और ज्यादा ताकतवर हो गई है।लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक दवे ने यह भी माना कि न्यायपालिका में 'कुछ बेहतरीन जज' भी रहे हैं, लेकिन दूसरे जजों के व्यवहार ने न्याय को भारी नुकसान पहुंचाया है। दवे 17वां के.एम. बशीर मेमोरियल में किसी खास विषय पर लेक्चर दे रहे थे।सुप्रीम कोर्ट में इतने सारे भ्रष्ट जज कि मुझे गिनती याद नहीं रही
दवे ने कहा कि न्यायपालिका में 48 साल तक वकील रहने के बाद मैं कह सकता हूं कि न्यायपालिका में कुछ बेहतरीन जज रहे हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में इतने सारे भ्रष्ट जज भी रहे हैं कि अब मुझे उनकी गिनती भी याद नहीं रही। उन्होंने आगे कहा कि न्याय इंसानों की बुनियादी जरूरत है।
दवे ने आरोप लगाया कि न्यायिक व्यवस्था अमीर और ताकतवर लोगों के पक्ष में झुक गई है। उन्होंने कहा कि वे न्याय को अपने पक्ष में मोड़ लेते हैं। अमीर और ताकतवर लोगों ने न्यायिक व्यवस्था पर कब्जा कर लिया है। उनके मामलों की सुनवाई तेजी से होती है।बड़े औद्योगिक घरानों को अक्सर अपने पक्ष में फैसले मिलते हैं
उन्होंने आगे कहा कि बड़े औद्योगिक घरानों को अक्सर अपने पक्ष में फैसले मिलते हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने मामलों में हमेशा सफल होते हैं। आप कोई भी बिजनेस अखबार उठाकर देख लें, आपको दिखेगा कि बड़े औद्योगिक घरानों को हर दूसरे या तीसरे दिन अपने पक्ष में कोई न कोई फैसला मिलता है। यह बहुत हैरानी की बात है कि वे सभी मामलों में कैसे सफल हो जाते हैं।
वे कभी हारते नहीं हैं, लेकिन असल में ऐसा ही हो रहा है। दवे ने न्यायपालिका और कार्यपालिका के रिश्तों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ऐसी कार्यपालिका का समर्थन कर रही है जो ज्यादा ताकतवर हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए अनुच्छेद 32 के तहत अपनी संवैधानिक भूमिका का ठीक से पालन नहीं कर रहा है।न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच के रिश्ते पर जताई चिंता
दवे ने न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच के रिश्ते को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ऐसी कार्यपालिका का समर्थन कर रही है जो ज़्यादा ताकतवर हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए अनुच्छेद 32 के तहत अपनी संवैधानिक भूमिका ठीक से नहीं निभा रहा है।