भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की वित्तीय निर्भरता कर्ज पर लगातार बढ़ती जा रही है। मंगलवार को राज्य सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियां जारी करके बाजार से 3,600 करोड़ रुपये का एक और नया कर्ज लिया है।
इस नई उधारी के साथ ही चालू वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज अब 12,800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
इस ताजा वित्तीय घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश पर कुल बकाया कर्ज का आंकड़ा 5 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया है।
31 मार्च तक की स्थिति और वर्तमान बोझ
वित्त विभाग से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्तीय वर्ष की समाप्ति यानी 31 मार्च 2026 तक मध्य प्रदेश पर कुल 4,88,714.17 करोड़ रुपये का कर्ज दर्ज था। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में ही ली गई 12,800 करोड़ रुपये की नई उधारी को इसमें शामिल करने के बाद राज्य पर कुल बकाया कर्ज अब 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
बजट अनुमान: इस साल ₹78,500 करोड़ बाजार से उठाने का लक्ष्य
सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में कुल 1,06,190 करोड़ रुपये का सार्वजनिक ऋण जुटाने का प्रावधान किया गया है। इस कुल प्रावधान में से सरकार का लक्ष्य बाजार से 78,500 करोड़ रुपये की उधारी जुटाने का है। वर्तमान स्थिति को देखें तो सरकार इस तय लक्ष्य का 16.30 प्रतिशत हिस्सा (12,800 करोड़ रुपये) वित्तीय वर्ष के शुरुआती दौर में ही उधार ले चुकी है।
मार्च 2027 तक ₹5.60 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है कुल कर्ज
रिपोर्ट के अनुसार, पुराने कर्जों के ब्याज और मूलधन के भुगतान की प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद भी इस साल कुल कर्ज में 71,753.38 करोड़ रुपये की शुद्ध बढ़ोतरी होने का अनुमान लगाया गया है।
इस निरंतर वृद्धि के कारण, आगामी 31 मार्च 2027 तक मध्य प्रदेश पर कुल बकाया कर्ज का ग्राफ बढ़कर 5,59,336.56 करोड़ रुपये (यानी लगभग 5.60 लाख करोड़ रुपये) के स्तर तक पहुंच सकता है।