इस्लामाबाद: भारत की तरफ से पिछले साल मई महीने में सिंधु जल संधि सस्पेंड करने के बाद से पाकिस्तान लगातार परेशान है। पाकिस्तान के जल एवं बिजली विकास प्राधिकरण (WAPDA) के चेयरमैन लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मुहम्मद सईद ने कहा है कि भारत के फैसले से पाकिस्तान के अस्तित्व पर संकट होगा। उन्होंने आशंका जताते हुए कहा है कि सिंधु जल संधि सस्पेंड होने से पाकिस्तान आधे समय तक मरुस्थल बना रहेगा जबकि आधे समय तक पानी में डूबा रहेगा।उन्होंने लिखा है कि सिंधु जल संधि की वजह से ही पाकिस्तान इंडस बेसिन इरिगेशन सिस्टम (IBIS) का विकास कर पाया जो दुनिया का सबसे बड़ा जुड़ा हुआ इरिगेशन सिस्टम है जिसमें तीन बड़े रिजर्वॉयर, छह बैराज, बारह इंटर-रिवर लिंक कैनाल और एक बड़ा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क शामिल है। इससे करीब 35 मिलियन एकड़ जमीन की सिंचाई की जाती है और देश के 90 प्रतिशत से ज्यादा फूड प्रोडक्शन को मदद मिलती है।
उन्होंने भारत पर आरोप लगाते हुए कहा है कि जब दुनिया 'वन वॉटर-वन विज़न' प्रिंसिपल को आगे बढ़ाते हुए शेयर्ड रिवर बेसिन पर गवर्नेंस और ट्रांसपेरेंसी को मजबूत करने की सोच रही है तो भारत पूरी तरह से उल्टी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
'पाकिस्तान को भुगतने होंगे काफी गंभीर नतीजे'
लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मुहम्मद सईद ने डॉन में लिखा है कि भारत के फैसले पर कानूनी बहस चाहे जो भी हो लेकिन पाकिस्तान के लिए इसके रणनीतिक नतीजे बहुत गंभीर हैं। क्योंकि सिंधु जल संधि पाकिस्तान की पानी, खाने और एनर्जी सिक्योरिटी की गारंटी देता है। उन्होंने लिखा है कि मई 2025 के बाद से भारत ने पश्चिमी नदियों पर अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट को तेज करने का काम तेजी से जारी रखा है। साथ ही रणबीर कैनाल और चिनाब-ब्यास लिंक टनल के काम के साथ साथ दूसरे प्रोजेक्ट्स भी तेजी से लागू किए जा रहे हैं और इन सबका अंजाम अंत में पाकिस्तान के लिए खतरे ही होंगे।उन्होंने आरोप लगाया है कि भारत ने IWT के तहत डेटा-शेयर करना बंद कर दिया है और पाकिस्तान के सिंधु जल कमिश्नर के साथ पश्चिमी नदियों के लिए हाइड्रोलॉजिकल डेटा शेयर करना भी सस्पेंड कर दिया है। इसका पिछले साल बाढ़ के मौसम के दौरान समय पर नदी के बहाव की जानकारी न मिलने से पाकिस्तान की बाढ़ को लेकर जानकारी और इमरजेंसी की तैयारियों पर बुरा असर पड़ा, जिससे इंसानी जिंदगी, जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजी-रोटी के लिए खतरा बढ़ गया।चेनाब नदी का अस्तित्वगत खतरा- उन्होंने लिखा है कि चेनाब नदी अकेले पाकिस्तान की 1 करोड़ एकड़ कृषि भूमि को सींचती है। इस नदी का लगभग पूरा कैचमेंट एरिया भारत में है जिससे पाकिस्तान इसके पानी के लिए पूरी तरह भारत पर निर्भर है।
बाढ़ की भविष्यवाणी में नाकामी- पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी ने लिखा है कि भारत की तरफ से 'हाइड्रोलॉजिकल डेटा' यानि नदियों के जलस्तर के आंकड़े रोकने की वजह से पाकिस्तान 2025 के मानसून में बाढ़ की सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सका जिससे जान-माल का भारी नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है।भारतीय प्रोजेक्ट्स से खतरे- उन्होंने आशंका जताते हुए लिखा है कि पाकिस्तान को किसी एक बांध से दिक्कत नहीं है बल्कि भारत की तरफ से बनाए जा रहे कई प्रोजेक्ट्स जैसे रणबीर नहर विस्तार और चेनाब-ब्यास लिंक टनल की सामूहिक क्षमता से खतरे हैं जिसके जरिए भारत जब चाहे पानी पूरी तरह नियंत्रित कर सकता है।
हाइड्रोपावर संकट- पाकिस्तान के पूर्व अधिकारी ने लिखा है कि पाकिस्तान का बिजली उत्पादन और आर्थिक विकास इन पश्चिमी नदियों के लगातार और उनसे पानी के अनुमानित बहाव पर टिका है। पानी रुकने या कम होने से वहां बिजली का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
SDGs लक्ष्य हासिल करना असंभव- WAPDA चेयरमैन ने डॉन में लिखा है कि भारत के इन कदमों के कारण पाकिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के 'सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स' (विशेषकर स्वच्छ जल और स्वच्छता से जुड़े लक्ष्य 6.5) को हासिल करना अब नामुमकिन होता जा रहा है।